एक आदमी

एक आदमी स्कूटर पर बैठ कर पिक्चर हाल
के सामने संता से पूछ बैठा :-
आदमी :- भाईसाहब , स्कूटर स्टैंड कहाँ है ?
संता :- भाईसाब , पहले आप अपना नाम
बताइये ?
आदमी :- रमेश !
संता :- आपके माता पिता क्या करते हैं ?
आदमी :- क्यों ? वैसे भाईसाब मैं , लेट
हो जाऊंगा और पिक्चर शुरू हो जाएगी !
संता :- तो जल्दी बताओ ??
आदमी :- मेरी माँ , एक डॉक्टर हैं और मेरे
पिता जी इंजीनियर हैं ! अब बता दीजिये ?
संता :- आपके नाम कोई जमीन जायजाद
है ?
आदमी :- हाँ , गांव में एक खेत मेरे नाम है ?
प्लीज़ भाईसाब अब बता दीजिये स्कूटर
का स्टैंड कहाँ है ?
संता :- आखिरी सवाल , तुम पढ़े लिखे हो ?
आदमी :- जी हाँ ! मैं, MBA कर रहा हूँ ! अब
बताइये जल्दी से !
संता :- भाईसाब , देखिये
आपकी पारिवारिक
पृष्ठभूमि इतनी अच्छी है , आपके
माता पिता दोनों उच्च शिक्षित हैं , आप
खुद भी इतने पढ़े लिखे हैं , पर मुझे अफ़सोस
है कि आप इतनी सी बात नहीं जानते
कि स्कूटर का स्टैंड उसके नीचे
लगा होता है , एक मेन और एक साइड वाला !
हा हा हा   

एक बार एक किसान की घड़ी

एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी. वैसे तो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस पाना चाहता था.

उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास किया, कभी कमरे में खोजता तो कभी बाड़े तो कभी अनाज के ढेर में ….पर तामाम कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली. उसने निश्चय किया की वो इस काम में बच्चों की मदद लेगा और उसने आवाज लगाई , ” सुनो बच्चों , तुममे से जो कोई भी मेरी खोई घडी खोज देगा उसे मैं १०० रुपये इनाम में दूंगा.”

फिर क्या था , सभी बच्चे जोर-शोर दे इस काम में लगा गए…वे हर जगह की ख़ाक छानने लगे , ऊपर-नीचे , बाहर, आँगन में ..हर जगह…पर घंटो बीत जाने पर भी घडी नहीं मिली.

अब लगभग सभी बच्चे हार मान चुके थे और किसान को भी यही लगा की घड़ी नहीं मिलेगी, तभी एक लड़का उसके पास आया और बोला , ” काका मुझे एक मौका और दीजिये, पर इस बार मैं ये काम अकेले ही करना चाहूँगा.”

किसान का क्या जा रहा था, उसे तो घडी चाहिए थी, उसने तुरंत हाँ कर दी.

लड़का एक-एक कर के घर के कमरों में जाने लगा…और जब वह किसान के शयन कक्ष से निकला तो घड़ी उसके हाथ में थी.

किसान घड़ी देख प्रसन्न हो गया और अचरज से पूछा ,” बेटा, कहाँ थी ये घड़ी , और जहाँ हम सभी असफल हो गए तुमने इसे कैसे ढूंढ निकाला ?”

लड़का बोला,” काका मैंने कुछ नहीं किया बस मैं कमरे में गया और चुप-चाप बैठ गया, और घड़ी की आवाज़ पर ध्यान केन्द्रित करने लगा , कमरे में शांति होने के कारण मुझे घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे गयी , जिससे मैंने उसकी दिशा का अंदाजा लगा लिया और आलमारी के पीछे गिरी ये घड़ी खोज निकाली.”

Friends, जिस तरह कमरे की शांति घड़ी ढूढने में मददगार साबित हुई उसी प्रकार मन की शांति हमें life की ज़रूरी चीजें समझने में मददगार होती है . हर दिन हमें अपने लिए थोडा वक़्त निकालना चाहिए , जसमे हम बिलकुल अकेले हों , जिसमे हम शांति से बैठ कर खुद से बात कर सकें और अपने भीतर की आवाज़ को सुन सकें , तभी हम life को और अच्छे ढंग से जी पायेंगे .

शराब के फायदे!

शराब के फायदे!
1. शराब व्यक्ति की नैसर्गिक प्रतिभा को बहार निकलता है| जैसे कोई अच्छा डांसर है लेकिन अपनी शर्म की वजह से लोगो के सामने नहीं नाच पाता, दो घूंट अन्दर जाते ही अपना ऐसा नृत्य पेश करता है कि उसके सामने माइकल जेक्सन भी पानी न मांगे।
ऐसे कई उदहारण आपने शादी-विवाह के अवसर पर शराबियों को नृत्य करते हुए देखा होगा।
कोई नागिन बनकर जमीन में लोटता है,
कोई घूँघट डाल कर महिला नृत्य पस्तुत करता है,
जो शेयर - ओ - शायरी और साहित्यिक बातें सामान्य अवस्था में नहीं की जाती, शराब पीने के बाद कई लोगो को बड़ी बड़ी साहित्यिक बातें शेयर - ओ - शायरी भी करते देखा गया है।
2. शराब व्यक्ति के आत्मविस्वास को कई गुणा बढ़ा देती है।
दो घूंट अन्दर जाते ही चूहे की तरह डरने वाला डरपोक से डरपोक व्यक्ति भी शेर की तरह गुर्राने लगता है।
शराब पीने के बाद कई पतियों को अपनी पत्नी के आगे गुर्रारते हुए देखा गया है।
3. शराब व्यक्ति को प्रकृति के करीब लाता है।
दो घूंट अन्दर जाते ही शराबियो का प्रकृति प्रेम उभर कर सामने आ जाता है कई शराबी शराब का आनंद लेने के बाद ज़मीन, कीचड़, नाली आदि प्राकृतिक जगहों पर विश्राम करते पाए जाते है।
4. शराब व्यक्ति की भाषाई भिन्नता को कम कर देता है जो लोग अंग्रेजी बोलना तो चाहते है लेकिन नहीं बोल पाते, अंग्रेजी बोलने में हिचकिचाहट महसूस करते है दो घूंट अन्दर जाते ही ऐसी धरा प्रवाह अंग्रेजी बोलने लगते है कि बड़े से बड़ा अंग्रेज़ भी शरमा जाये ऐसे कई लोगो से आपका पाला पड़ा होगा।
5. शराब व्यक्ति को दिलदार बनाती है।
कंजूस से कंजूस व्यक्ति भी दो घूंट अन्दर जाते ही किसी सल्तनत के बादशाह की तरह व्यवहार करने लगता है।
ऐसे लोगो के जेब में भले फूटी कौड़ी न हो लेकिन ये लोग ज़माने को खरीदने में पीछे नहीं हटते है।

एक पहलवान

एक बार खूब लंबा-तगड़ा एक पहलवान बस में
चढ़ा।
कंडक्टर: भाई साहब, टिकट?
.
पहलवान: हम टिकट नहीं लेते।
.
कंडक्टर डर के मारे कुछ नहीं कर सका।
लेकिन कंडक्टर ने इस बात को दिल पर ले
लिया।
कंडक्टर जिम जाकर खूब मेहनत करने लगा।
.
पहलवान रोज बस में चढ़ता।
.
कंडक्टर रोज पूछता: भाई साहब,
टिकट?
.
पहलवान रोज जवाब देता: हम टिकट
नहीं लेते।
महीने में कंडक्टर पहलवान की तरह
तगड़ा हो गया।
.
पहलवान फिर बस में चढ़ा।
.
कंडक्टर: भाई, टिकट ले ले।
.
पहलवान: हम टिकट नहीं लेते।
.
कंडक्टर छाती चौड़ी करके बोला:
क्यों नहीं लेता तू ?
.
पहलवान: पास बनवा रखा है,
इसीलिए नहीं लेता।   

डॉक्टर साहब

एक डॉक्टर साहब एक पार्टी में गए।

अपने बीच शहर के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर
को पाकर लोगों ने उन्हें घेर लिया।
किसी को जुकाम था तो किसी के पेट में गैस,
इसीलिए सभी मुफ्त की राय लेने के चक्कर
में डॉक्टर के पास पहुंच गए।

शिष्टाचारवश डॉक्टर साहब
किसी को मना नहीं कर पा रहे थे।

उसी पार्टी में शहर के एक नामी वकील
भी आए हुए थे, मौका मिलते ही डॉक्टर
साहब वकील साहब के पास पहुंचे और
उन्हें एक ओर ले जाकर बोले, यार! मैं
तो परेशान हो गया हूं, सभी फ्री में इलाज
कराने के चक्कर में हैं, तुम्हें भी ऐसे लोग
मिलते हैं क्या?

वकील- बहुत मिलते हैं।

डॉक्टर- तो फिर उनसे कैसे निपटते हो?

वकील- बिलकुल सीधा तरीका है, मैं उन्हें
सलाह देता हूं जैसा कि वो चाहते हैं, बाद में
उनके घर बिल भिजवा देता हूं।

यह बात डॉक्टर साहब को कुछ जम गई,
अगले रोज उन्होंने भी पार्टी में मिले कुछ
लोगों के नाम बिल बनाए और उन्हें
भिजवाने ही वाले थे कि तभी उनका नौकर
अन्दर आया और बोला, साहब, कोई आपसे
मिलना चाहता है।

डॉक्टर- कौन है?

नौकर- वकील साहब का चपरासी है,
कहता है कल रात पार्टी में आपने वकील
साहब से जो राय ली थी उसका बिल लाया है 

पिताजी

पिताजी के अचानक आ धमकने से
पत्नी तमतमा उठी- “लगता है, बूढ़े
को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है,
वर्ना यहाँ कौन
आनेवाला था! अपने पेट
का गड्ढ़ा भरता नहीं,
घरवालों का कहाँ से भरोगे?” मैं नज़रें बचाकर
दूसरी ओर देखने लगा। पिताजी नल पर हाथ-
मुँह
धोकर सफ़र की थकान दूर कर रहे थे। इस
बार
मेरा हाथ कुछ ज्यादा ही तंग हो गया। बड़े बेटे
का जूता फट चुका है। वह स्कूल जाते वक्त
रोज
भुनभुनाता है। पत्नी के इलाज केलिए
पूरी दवाइयाँ नहीं खरीदी जा सकीं।
बाबूजी को भी अभी आना था। घर में बोझिल
चुप्पी पसरी हुई थी। खाना खा चुकने पर
पिताजी ने
मुझे पास बैठने का इशारा किया। मैं शंकित
था कि कोई आर्थिक समस्या लेकर आये
होंगे।
पिताजी कुर्सी पर उठ कर बैठ गए। एकदम
बेफिक्र। “सुनो” कहकर उन्होंने मेरा ध्यान
अपनी ओर खींचा। मैं सांस रोकर उनके मुँह
की ओर
देखने लगा। रोम-रोम कान बनकर
अगला वाक्य
सुनने के लिए चौकन्ना था। वे बोले, “खेती के
काम
में घड़ी भर भी फुर्सत नहीं मिलती। इस बखत
काम
का जोर है। रात की गाड़ी से वापस जाऊँगा।
तीन
महीने से तुम्हारी कोई चिट्ठी तक नहीं मिली।
जब
तुम परेशान होते हो, तभी ऐसा करते हो।"
उन्होंने
जेब से सौ-सौ के सौ नोट निकालकर
मेरी तरफ
बढ़ा दिए, “रख लो। तुम्हारे काम आएंगे। धान
की फसल अच्छी हो गई थी। घर में कोई
दिक्कत
नहीं है। तुम बहुत कमजोर लग रहे हो। ढंग से
खाया-पिया करो। बहू का भी ध्यान रखो।" मैं
कुछ
नहीं बोल पाया। शब्द जैसे मेरे हलक में
फंसकर रह
गये हों। मैं कुछ कहता इससे पूर्व
ही पिताजी ने
प्यार से डांटा, “ले लो। बहुत बड़े हो गये
हो क्या?”
“नहीं तो।" मैंने हाथ बढ़ाया। पिताजी ने नोट
मेरी हथेली पर रख दिए। बरसों पहले
पिताजी मुझे
स्कूल भेजने के लिए इसी तरह हथेली पर
अठन्नी टिका देते थे, पर तब मेरी नज़रें आज
की तरह झुकी नहीं होती थीं। दोस्तों एक बात
हमेशा ध्यान रखे माँ बाप अपने बच्चो पर
बोझ
हो सकते हैं... बच्चे उन पर बोझ
कभी नही होते है...

स्कूल में छुट्टी की घोषणा

एक दिन किसी कारण से स्कूल में
छुट्टी की घोषणा होने के कारण,एक दर्जी का बेटा,
अपने पापा की दुकान पर चला गया ।
वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते
हुए देखने लगा ।
उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और
कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं ।
फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सुई
को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं ।
जब उसने इसी क्रिया को चार-पाँच बार
देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से
कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है ?
पापा ने कहा-बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो ?
बेटा बोला- पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं ,
आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के
नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे
टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों ?
इसका जो उत्तर पापा ने दिया-उन दो पंक्तियाँ में
मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया ।
उत्तर था- ” बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और
सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह
हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह
हमेशा ऊपर होती है ।
यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और
कैंची को पैर के नीचे रखता हूं........!!
शेयर जरुर करे दोस्तों ........!!!!

तीन भारतीयों के हाथों में गूगल की कमान

तीन भारतीयों के हाथों में गूगल की कमान

इकनॉमिक टाइम्स | Jul 23, 2014, 09.21AM IST

शैली सिंह, नई दिल्ली
हाल तक निकेश अरोड़ा गूगल के चीफ बिजनेस ऑफिसर और सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले एग्जेक्युटिव थे। अब वह कंपनी छोड़कर जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद 60 अरब डॉलर की दिग्गज ग्लोबल सर्च कंपनी की कमान तीन भारतीय इंजीनियर्स के हाथों में रहेगी।

गूगल को जहां से ताकत मिलती है, वे काम अमित सिंघल, सुंदर पिचाई और श्रीधर रामास्वामी के जिम्मे हैं। ये तीनों सीधे गूगल के को-फाउंडर और सीईओ लैरी पेज को रिपोर्ट करते हैं। वे गूगल के उस ग्रुप का हिस्सा हैं, जिसे एल-टीम यानी 'लैरी की टीम' के नाम से जाना जाता है।

इनोवेशन और नए प्रॉडक्ट्स लाने का काम यही तीन लोग करते हैं और कंपनी के 40,000 एंप्लॉयीज में से ज्यादातर उन्हें रिपोर्ट करते हैं। सिंघल, पिचाई और रामास्वामी भी अरोड़ा की तरह वाइस प्रेजिडेंट हैं। वे गूगल के टॉप 8 एग्जेक्युटिव्स वाले ग्रुप का हिस्सा हैं।

गूगल के ऐड प्रॉडक्ट्स की इंजीनियरिंग रामास्वामी के जिम्मे है। गूगल की कमाई में विज्ञापन का सबसे बड़ा रोल है। सिंघल सर्च ऑपरेशंस हेड करते हैं और वह 'गूगल फेलो' भी हैं। कंपनी में यह खिताब टॉप साइंटिस्ट्स को ही मिलता है। पिचाई कंपनी के मौजूदा 'हॉट बिजनेसेज'- क्रोम, एंड्रॉयड और एप्स चलाते हैं।

उन्हें कभी माइक्रोसॉफ्ट की टॉप पोस्ट का दावेदार माना जाता था। हालांकि इस साल फरवरी में यह पद सत्या नाडेला को मिला। पिचाई को 2013 में ऐंड्रॉयड का जिम्मा सौंपा गया था। ऐंड्रॉयड वह ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिस पर दुनिया के 70 पर्सेंट स्मार्टफोन चलते हैं।

गूगल के फाउंडर लैरी पेज ने ब्लूमबर्ग बिजनसवीक को दिए हालिया इंटरव्यू में कहा था, 'पिचाई को टेक्नॉलजी की जबरदस्त समझ है। नए प्रॉडक्ट्स के बारे में सोचने में उनका जवाब नहीं है। इस तरह का कॉम्बिनेशन बहुत कम लोगों में दिखता है। इसी वजह से वह ग्रेट लीडर हैं।' गूगल यह जानकारी नहीं देती है कि इन तीनों की सैलरी कितनी है और उन्हें कंपनी के कितने स्टॉक्स सैलरी पैकेज के तौर पर दिए गए हैं।

क्या इन तीनों में से कोई एक किसी दिन गूगल का सीईओ बन सकता है? कुछ लोगों का कहना है कि अरोड़ा के मुकाबले इनमें से किसी एक के सीईओ बनने के चांसेज ज्यादा हैं। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के फॉर्मर चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने कहा, 'इनोवेशन पर निर्भर किसी प्रॉडक्ट कंपनी को टेक्नॉलजी में महारत रखने वाले बॉस की जरूरत होगी।'

ईएमए पार्टनर्स इंटरनैशनल के मैनेजिंग पार्टनर के सुंदरेशन का कहना है कि गूगल जैसी कंपनियों की रीढ़ टेक्नॉलजी है। इन तीन भारतीयों के पास वह खूबी है, जो उन्हें गूगल का बॉस बना सकती है। अरोड़ा में यह खूबी नहीं थी।

Mr Bean Meets The Queen

Mr Bean Meets The Queen

video

छोटा सा गाँव

छोटा सा मेरा गाँव पुरा बिग बाजार था
एक नाई एक खाती एक काला लुहार था ।
छोटे छोटे घर हर आदमी बङा दिलदार था
छोटा सा मेरा गाँव पुरा बिग बाजार था ।
कही भी रोटी खा लेते हर घर मे भोजन तैयार
था
बटोङो पर घीया तौरी लग जाती जिसके
आगे शाही पनीर बेकार था ।।
छोटा सा मेरा गाँव पुरा बिग बाजार
था ।।।
दो मिनट की मैगी नही झटपट दलिया तैयार
था ।
नीम की निम्बोली और शहतुत सदाबहार थे
मिट्टी का मटका कसकर बजा लेते
राजु पुरा संगीतकार था ।।
मेरा छोटा सा मेरा गाँव पुरा बिग बाजार
था ।।।
मुलतानी मिट्टी से गांव के जोहङ मे नहा लेते
साबुन और स्विमिंग पूल बेकार था
और फिर कब्बड्डी खेल लेते कौनसा हमारे
क्रिकेट का खुमार था ।।
छोटा सा मेरा गाँव पुरा बिग बाजार
था।।।
बुड्ढे लोगो की बातें सुन लेते
कौनसा टेलीविजन और अखबार थे
सभी एक दुसरे को देखकर राजी थे सभी मे बहुत
प्यार था ।।
छोटा सा मेरा गाँव पुरा बिग बाजार
था ।।।
वो प्यार वो संस्कृति अब मै कहाँ से लाऊ
यह सोच सोच कर मै बहुत परेशान हुं
अगर वही समय आ जाऐ तो बहुत मजा आ जाए
और फिर मै अपनी असली जिंदगी जी पाऊ
और मै फिर ईस धरती पर सौ सौ शीश झुकाऊ
।।।
भारत माता की जय

Some Important Portals & their Founders


1. Google— Larry Page & Sergey Brin
2. Facebook— Mark Zuckerberg
3. Yahoo— David Filo & Jerry Yang
4. Twitter— Jack Dorsey & Dick Costolo
5. Internet— Tim Berners Lee
6. Linkdin— Reid Hoffman, Allen Blue&
Koonstantin Guericke
7. Email— Shiva Ayyadurai
8. Gtalk— Richard Wah kan
9. Whats up— Brian Acton and Jan Koum
10. Hotmail— Sabeer Bhatia
11. Orkut— Buyukkokten
12. Wikipedia— Jimmy Wales
13. You tube— Steve Chen, Chad Hurley &
JawedKarim
14. Rediffmail— Ajit Balakrishnan
15. Nimbuzz— Martin Smink & Evert Jaap
Lugt
16. Myspace— Chris Dewolfe & Tom
Anderson
17. Ibibo— Ashish Kashyap
18. OLX— Alec Oxenford & Fabrice Grinda
19. Skype— Niklas Zennstrom,JanusFriis &
Reid Hoffman
20. Opera— Jon Stephenson von Tetzchner &
Geir lvarsoy
21. Mozilla Firefox— Dave Hyatt & Blake Ross
22. Blogger— Evan Willams..

Evening Refreshment

एक नौजवान ने एक बुजुर्ग से
पूछा :बाबा बताएं जब एक दिन
दुनिया से जाना है तो फिर लोग पैसो के पीछे
क्यों भागते हैं ?.
.
जब जमीन जायदाद जेवर यहीं रह
जाते हैं तो लोग
इनको अपनी जिन्दगी क्यों बनाते हैं ??.
.
जब रिश्ते निभाने
की बारी आती है तो दोस्त
ही दुश्मनी क्यों निभाते
हैं ??.
.
बुजुर्ग ने गौर से तीनों सवाल सुने और
अपनी जेब में हाथ डाला....
.
नौजवान बड़े गौर से सब देख रहा था...फिर
उस बुज़ुर्ग ने
अपनी जेब से माचिस
की डिब्बी निकली....
.
माचिस की डब्बी से तीन
तीलियाँ निकाली.
.
दो तीलियाँ उसने उस लड़के की तरफ
फेंक दी...
एक उसके दायें में और एक बायीं तरफ....
.
और एक तीली को आधा तोड़
कर उपर वाला भाग फेंक दिया...लड़का ये
सब बड़े गौर से देख
रहा था.
.
इसके बाद बाबा ने बची हुई
तीली के नीचे वाले भाग
को नुकीला बनाया...और आसमान
की तरफ देखा....
.
लड़के
की जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी...
.
बाबा ने नुकीला हिस्सा अपने मुँह में
डाला और
अपने दांत कुरेदते हुए बोले -.
.
मुझे क्या मालूम उल्लू के पट्ठे...
हा हा हा    

Newton & Sultan Rahi


Once, Newton came to Pakistan and watched a few Lollywood movies that had his head spinning. He was convinced that all his logic and laws in physics were just a huge pile of junk and apologized for everything he had done.

In the movies of Sultan Rahi, Newton was confused to such an extent that he went paranoid. Here are a few scenes

1) Sultan Rahi has a Brain Tumor which, according to the doctors can't be cured and his death is imminent. In one of the fights, our great Sultan Rahi is shot in the head. To everybody's surprise, the bullet passes through his ears taking away the tumor along with it and he is cured!
Long Live Sultan Rahi!

2) In another movie, Sultan Rahi is confronted with 3 gangsters. Sultan Rahi has a gun but unfortunately only one bullet and a knife. Guess, what he does? He throws the knife at the middle gangster? & shoots the bullet towards the knife. The knife cuts the bullet into 2 pieces, which kills both the gangsters on each side of the middle gangster & the knife kills the middle one.

3) Sultan Rahi is chased by a gangster. Sultan Rahi has a revolver but no bullets in it. Guess what he does. Nah? Not even in your remotest imaginations. He waits for the gangster to shoot. As soon as the gangster shoots, Sultan Rahi opens the bullet compartment of his revolver and catches the bullet. Then, he closes the bullet compartment and fires his gun. Bang... the gangster dies...

This was too much for our Newton to take! He was completely shaken and decided to go back. But he happened to see another movie for one last time, and thought that at least one movie would follow his theory of physics. The whole movie goes fine and Newton is happy that all in the world hasn't changed. Oops, not so fast!

The 'climax' finally arrives.

Sultan Rahi gets to know that the villain is on the other side of a very high wall. So high that Sultan Rahi can't jump even if he tries like one of those superman techniques that our heroes normally use. Sultan Rahi has to desperately kill the villain because it's the climax. ( Newton dada is smiling since it is virtually impossible?) Sultan Rahi suddenly pulls two guns from his pockets. He throws one gun in the air and when the gun has reached above the height of the wall, he uses the second gun and shoots at the trigger of the first gun in air. The first gun fires off and the villain is dead.

Newton commits suicide...










आदरणीय Narendra Modi Ji

आदरणीय PM Narendra Modi Ji जब देश कांग्रेस के हाथो बिक रहा था और हम सभी ये मान बैठे थे की अब कुछ नहीं हो सकता. उस समय आपने हममे एक नए आशा का संचार किया.
किसी सूर्य की तरह आपने हमे रास्ता दिखाया. हम
युवा जोश से भरे हुवे आपके पीछे चलते गए.
बेरोजगारी, भ्रष्टाचार , घोटालो से त्रस्त थे हम पर जो चीज़ हमे सबसे जयादा खटक
रहा था वो था हमारा आत्मसम्मान
कुचला जा रहा था. कभी -सेकुलरिज्म के चलते
तो कभी देश की सेना के कमज़ोर आत्मबल और उनके
कटते सिरों के चलते.
हम २ वक़्त भूखे रहने को तैयार थे पर सीमा पर पकिस्तनियों और देश में सेकुलरिज्म के बुरखे तले होते
अत्याचार नहीं सह सकते थे.
पर आज भी हालत वही है..हम जानते है
आपकी प्राथमिकता देश के खजाने को भरना है क्यू
के भूखे पेट भजन भी नहीं होता...पर काम से काम
अपने निकम्मे गृह मंत्री को तो कुछ करने को कहिये..क्या खजाना भरने से लेकर देश
की सुरक्षा सब
प्रधानमंत्री की अकेली जिम्मेदारी है क्या?
गृह मंत्रालय ऐसे -ऐसे कदम उठा रहा है जिन्हे
कहते हुवे भी शर्म आती है..
कत्लखानो को अभी भी सब्सिडी मिल रही है...अमर नाथ यात्रिओ पर जुल्म ढ़ाए जा रहे
हैं..आखिर घाटी में सैन्य बल इतनी कमज़ोर कैसे
हो गयी की २०-३० अलगाववादियोञ ने पूरा कैंप उजर
दिया.
कौन सी दुविधा है जिसने उत्तरप्रदेश में
समाजवादी पार्टी को बर्खास्त होने से अब तक बचा रखा है..
प्रधानमंत्री जी ये फैसले सिर्फ आप ही ले सकते हैं और
इनके लिए देश
का खजाना भरा होना जरूरी नहीं है..
हमे पता है हमने किसी नपुंसक को वोट
नहीं दिया है..हमने वोट बीजेपी को भी नहीं दिया है..हमने वोट नरेंद्र
मोदी को दिया है.
एक बार तो ध्यान दीजिये इन मुद्दो पर..काम से
काम अपने गृह मंत्री के कान तो खींचिए..ये
गृह मंत्रालय नहीं सेकुलरो के हित में फैसला लेने
वाला मंत्रालय बन गया है..|यदि भूल वश कोई अपमानजनक बात लिख
दिया हो तो क्षमा करेंगे. .

5 Basic Of Life

1. एक बार, गांव वालों ने सूखे के हालात देखकर तय किया कि वे
भगवान से बरसात के लिए प्रार्थना करेंगे, प्रार्थना वाले दिन
सभी लोग प्रार्थना के लिए इकट्ठे हुए, लेकिन एक
लड़का छाता लेकर आया.!!!
इसे कहते हैं : विश्वास

2. जब आप एक बच्चे को ऊपर की तरफ उछालते हो, तो वह
हंसता है। क्योंकि, वह जानता है कि आप उसे पकड़ लोगे:
इसे कहते हैं : यकीन

3. हर रात हम बिस्तर पर सोने जाते हैं, यह जाने बगैर कि हम
अगली सुबह जीवित रहेंगे भी कि नहीं और हर रात नई सुबह के
लिए अलार्म भी सैट करते हैं।
इसे कहते हैं उम्मीद:

4. हम आने वाले कल की बड़ी-बड़ी प्लानिंग करते हैं, बावजूद
इसके कि हमें भविष्य का जरा भी ज्ञान नहीं हैं।
इसे कहते हैं: कान्फिडेंस

5. अपने दोस्तों-यारों और परिचितों को उनकी शादी के बाद हम
बीवी के नाम पर रोते-बिलखते और परेशान होते हुए देखते हैं।
हम फिर भी शादी करते हैं....???????
इसे कहते हैं: ओवर कान्फिडेंस :

Joke a part of Life

एक रेलगाड़ी चलते चलते अचानक पटरी से उतरकर आजू-बाजू के खेतों में घुस गई और फिर से वापस पटरी पर आ गई। सारे यात्री डर के मारे सहम गए। अगले ही स्टेशन पर रेलगाड़ी के चालक को पकड़ लिया गया। जाँच अधिकारी ने चालक से
इसका कारन पूछा।

चालक ने बताया कि एक आदमी पटरी पर खड़ा था और मेरे कई बार हार्न बजाने के बावजूद वह पटरी से नहीं हट रहा था।

जाँच अधिकारी ने कहा, "तुम पागल हो क्या ? एक आदमी की जान बचाने के लिए तुमने इतने लोगों की जान खतरे में डाल दी। तुम्हें तो उस आदमी को कुचल देना चाहिए था।"

चालक: वही तो मैं करने जा रहा था लेकिन जैसे ही गाड़ी उसके एक दम नजदीक पहुंची वह कम्बख्त खेतों में इधर उधर भागने लगा।   


-------------------------------------------
Girl to another girl: You are beautiful.
Other girl: Thank you, you are beautiful too.

&

BOY to another boy: You are handsome.
Other boy: Tu Gay to nahi hai na saale?   
------------------------------------------------------------------
भिखारी:-
दादी रोटी दीजिए खाने के
लिए
.
.
दादी:- अभी तैयार नहीं है,
बाद में आना
.
.
भिखारी: 98xxxxxxxx
ये मेरा मोबाइल नंबर है, तैयार
होते ही मिस कॉल कर देना
.......
"भिखारी rocks दादी shocks"
.
.
पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त
.
.
दादी:- अरे मिस कॉल
क्या करना, थोड़ी देर के बाद
जब
रोटी बन जाएगी
तो WhatsApp पर अपलोड कर
दूंगी डाउनलोड करके
खा लेना !!
.
.
"अब दादी rocks
भिखारी shocks" 

लकड़ी का कटोरा

लकड़ी का कटोरा :
एक वृद्ध व्यक्ति अपने बहु – बेटे के
यहाँ शहर रहने गया . उम्र के इस पड़ाव पर
वह अत्यंत कमजोर हो चुका था , उसके हाथ
कांपते थे और दिखाई भी कम देता था .
वो एक छोटे से घर में रहते थे , पूरा परिवार और
उसका चार वर्षीया पोता एक साथ डिनर
टेबल पर खाना खाते थे . लेकिन वृद्ध होने के
कारण उस व्यक्ति को खाने में
बड़ी दिक्कत
होती थी .
कभी मटर के दाने
उसकी चम्मच से निकल कर फर्श पे
बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध
छलक कर मेजपोश पर गिर जाता .
बहु -बेटे एक -दो दिन ये सब सहन करते रहे
पर अब उन्हें अपने पिता की इस
काम से चिढ होने लगी . “ हमें
इनका कुछ करना पड़ेगा ”, लड़के ने कहा . बहु ने
भी हाँ में हाँ मिलाई और
बोली ,” आखिर कब तक हम
इनकी वजह से अपने खाने
का मजा किरकिरा रहेंगे , और हम इस तरह
चीजों का नुक्सान होते हुए
भी नहीं देख सकते .”
अगले दिन जब खाने का वक़्त हुआ तो बेटे ने एक
पुरानी मेज को कमरे के कोने में
लगा दिया , अब बूढ़े
पिता को वहीँ अकेले बैठ कर
अपना भोजन करना था . यहाँ तक
की उनके खाने के
बर्तनों की जगह एक
लकड़ी का कटोरा दे दिया गया था ,
ताकि अब और बर्तन ना टूट -फूट सकें .
बाकी लोग पहले
की तरह ही आराम से
बैठ कर खाते और जब कभी -कभार
उस बुजुर्ग की तरफ देखते
तो उनकी आँखों में आंसू दिखाई देते .
यह देखकर भी बहु-बेटे का मन
नहीं पिघलता ,वो उनकी छोटी से
छोटी गलती पर ढेरों बातें
सुना देते . वहां बैठा बालक भी यह
सब बड़े ध्यान से देखता रहता , और अपने में
मस्त रहता .
एक रात खाने से पहले , उस छोटे बालक को उसके
माता -पिता ने ज़मीन पर बैठ कर कुछ
करते हुए देखा , ”तुम क्या बना रहे हो ?” पिता ने
पूछा ,
बच्चे ने मासूमियत के साथ उत्तर दिया , “ अरे मैं
तो आप लोगों के लिए एक
लकड़ी का कटोरा बना रहा हूँ ,
ताकि जब मैं बड़ा हो जाऊं तो आप लोग इसमें
खा सकें .” ,और वह पुनः अपने काम में लग
गया . पर इस बात का उसके माता -पिता पर बहुत
गहरा असर हुआ ,उनके मुंह से एक
भी शब्द
नहीं निकला और आँखों से आंसू
बहने लगे . वो दोनों बिना बोले
ही समझ चुके थे कि अब उन्हें
क्या करना है . उस रात वो अपने बूढ़े
पिता को वापस डिनर टेबल पर ले आये , और फिर
कभी उनके साथ अभद्र व्यवहार
नहीं किया .